पासकी (Passkeys) दो-चरणीय सत्यापन (2FA) से कैसे अलग हैं?

schedule अंतिम अपडेट किया गया: January 20, 2026
दोनों सुरक्षा बढ़ाते हैं, लेकिन इनका तरीका अलग है। टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2FA) में पासवर्ड डालने के बाद एक दूसरा फ़ैक्टर जोड़ा जाता है—आमतौर पर ऑथेंटिकेटर ऐप से मिलने वाला कोड। पासकीज़ तुम्हारे पासवर्ड को पूरी तरह बदल देती हैं और एक ही स्टेप में मल्टी-फ़ैक्टर सुरक्षा देती हैं, क्योंकि ये “तुम्हारे पास क्या है” (तुम्हारा डिवाइस) को “तुम कौन हो” (बायोमेट्रिक) या “तुम्हें क्या पता है” (डिवाइस PIN) के साथ जोड़ती हैं। पासकीज़ को ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि ये: फ़िशिंग-रेज़िस्टेंट होती हैं (ये सिर्फ़ असली वेबसाइट पर ही काम करती हैं), पासवर्ड डेटाबेस के लीक/ब्रिच से प्रभावित नहीं होतीं, और इन्हें अनुमान लगाकर या क्रैक करके तोड़ा नहीं जा सकता। अगर तुम्हारे पास पासकीज़ और 2FA दोनों सक्षम हैं, तो पासकी से साइन इन करने पर 2FA वाला प्रॉम्प्ट स्किप हो जाएगा, क्योंकि पासकीज़ पहले से ही बराबर या उससे भी मजबूत सुरक्षा देती हैं।

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